टीम बिल्डिंग नोएडा — Veda Adventures Park, Noida

टीम बिल्डिंग एक्टिविटीज़ नोएडा — बोरिंग ऑफ़साइट से आगे

ऑफ़साइट का मतलब अक्सर होटल का एक कमरा, प्रोजेक्टर और लंबी मीटिंग बन जाता है। टीम असल में तब खुलती है जब सब एक ही रस्सी खींच रहे हों या एक-दूसरे को रोप कोर्स पार करवा रहे हों। नोएडा सेक्टर 150 का एडवेंचर पार्क इसी के लिए बना है।

कौन सी एक्टिविटीज़ टीम के लिए सबसे अच्छी

  • टग ऑफ वॉर — सबसे पुराना पर सबसे असरदार, पूरी टीम एक साथ।
  • ऑब्स्टेकल रोप कोर्स — एक-दूसरे को गाइड करना पड़ता है, भरोसा बनता है।
  • कमांडो नेट और टायर वॉल — बिना मदद के पार करना मुश्किल है।
  • क्रिकेट बॉक्स और वॉलीबॉल — डिपार्टमेंट के बीच हेल्दी कॉम्पिटिशन।
  • आर्चरी और शूटिंग — शांत रहकर फ़ोकस करने वाली एक्टिविटी।

दिन कैसे प्लान करें

  • सुबह — आइस-ब्रेकर और हल्की ग्रुप गेम्स।
  • दोपहर से पहले — रोप कोर्स, कमांडो नेट जैसी चैलेंजिंग एक्टिविटीज़।
  • लंच — इन-हाउस कैफ़े में।
  • शाम — टग ऑफ वॉर या क्रिकेट जैसा ग्रुप फ़िनाले, फिर छोटी सी बातचीत।

ATV और पैरामोटरिंग चाहिए तो अलग से बुक करनी होगी — ये कॉर्पोरेट पैकेज में शामिल नहीं हैं।

HR और एडमिन के लिए प्रैक्टिकल बातें

  • 100+ कार की फ्री पार्किंग, बड़ी टीम के लिए भी दिक्कत नहीं।
  • नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे से कनेक्टेड — नोएडा, दिल्ली और ग़ाज़ियाबाद तीनों से पहुँचना आसान।
  • हर एक्टिविटी पर सेफ़्टी गियर और ट्रेंड स्टाफ़।
  • अलग-अलग फ़िटनेस लेवल के लोगों के लिए हल्की एक्टिविटीज़ भी हैं — किसी को ज़बरदस्ती नहीं करनी पड़ती।

बजट का हिसाब

ग्राउंड एक्टिविटीज़ के लिए Adults Pass ₹799 प्रति व्यक्ति है, जिसमें Melts Down और Bull Ride भी आती हैं। बड़ी टीम के लिए ग्रुप रेट पूछ लें — +91 89546 64488

टीम साइज़ के हिसाब से प्लान

टीम साइज़क्या सही रहेगा
10–20 लोगसारी एक्टिविटीज़ एक साथ, रोटेशन की ज़रूरत नहीं
20–50 लोग2–3 ग्रुप बनाकर रोटेशन, बीच में कॉम्पिटिशन
50–100 लोग4–5 ग्रुप, डिपार्टमेंट-वाइज़ टीमें, पॉइंट सिस्टम
100+ लोगपहले से कोऑर्डिनेशन ज़रूरी, अलग टाइम स्लॉट लीजिए

बड़ी टीम है तो कॉर्पोरेट टीम आउटिंग गाइड में लॉजिस्टिक्स की डिटेल है।

कौन सी एक्टिविटी क्या सिखाती है

एक्टिविटीटीम स्किल
टग ऑफ वॉरएक साथ ताक़त लगाना, टाइमिंग
ऑब्स्टेकल रोप कोर्सभरोसा और एक-दूसरे को गाइड करना
कमांडो नेटप्लानिंग और मदद
टायर वॉलबिना टीम के पार करना मुश्किल
क्रिकेट बॉक्स / वॉलीबॉलहेल्दी कॉम्पिटिशन
आर्चरी / शूटिंगफ़ोकस और शांति

HR के लिए प्रैक्टिकल चेकलिस्ट

  • तारीख़ 3–4 हफ़्ते पहले लॉक करें
  • पक्की हेडकाउंट लें (लोग आख़िर में बदलते हैं)
  • ट्रांसपोर्ट — कंपनी बस या कैब पूल तय करें
  • खाने में वेज/नॉन-वेज और एलर्जी की जानकारी पहले भेजें
  • ड्रेस कोड बता दें — बंद जूते ज़रूरी
  • जो लोग फ़िज़िकल एक्टिविटी नहीं कर सकते, उनके लिए विकल्प रखें
  • फ़ोटोग्राफ़र या कोई एक व्यक्ति फ़ोटो के लिए तय करें

सबको शामिल कैसे करें

हर टीम में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो ऊँचाई या शारीरिक एक्टिविटी में सहज नहीं होते। उन्हें छोड़ देना उल्टा असर करता है।

ऐसे लोगों के लिए कैरम, चेस, डार्ट बोर्ड, स्नेक एंड लैडर और जायंट टिक टैक टो जैसी एक्टिविटीज़ हैं। उन्हें स्कोर-कीपर या टीम कैप्टन बना दीजिए — शामिल भी रहेंगे और दबाव भी नहीं होगा।

दिल्ली के पास एक दिन का ऑफ़साइट प्लान करना हो तो दिल्ली कॉर्पोरेट आउटिंग गाइड देखिए।

ऑफ़साइट के बाद क्या करें

आउटिंग का असर तभी टिकता है जब उसे ऑफिस में जोड़ा जाए:

  • अगले दिन फ़ोटो शेयर कीजिए
  • जीतने वाली टीम को छोटा सा रिकग्निशन दीजिए
  • एक छोटी फ़ीडबैक फ़ॉर्म भेजिए — अगली बार काम आएगी
  • जो नए लोग मिले, उन्हें प्रोजेक्ट में जोड़ने की कोशिश कीजिए

बजट और पास की डिटेल टिकट प्राइस गाइड में है।

ऑफ़साइट में आम ग़लतियाँ

बहुत सी कंपनियाँ टीम आउटिंग तो कराती हैं, पर कुछ आम ग़लतियों से असर कम हो जाता है।

सब कुछ ठूँस देना — एक दिन में 15 एक्टिविटीज़ कराने की कोशिश मत कीजिए। 6–8 अच्छी एक्टिविटीज़ ज़्यादा असर करती हैं।

मीटिंग साथ में रखना — आउटिंग के बीच में प्रेज़ेंटेशन रखने से पूरा माहौल ख़राब हो जाता है। काम की बात अलग दिन रखिए।

सिर्फ़ फ़िट लोगों को ध्यान में रखना — टीम में हर तरह के लोग होते हैं। सबके लिए कुछ न कुछ होना चाहिए।

ज़बरदस्ती — जो नहीं करना चाहता, उसे मत कीजिए। दबाव उल्टा असर करता है।

फ़ीडबैक न लेना — अगली बार बेहतर करने के लिए छोटी सी फ़ॉर्म भेजिए।

टीम को ग्रुप में कैसे बाँटें

ग्रुप बनाने का तरीक़ा ही तय करता है कि आउटिंग से फ़ायदा होगा या नहीं।

डिपार्टमेंट मिक्स कीजिए — सेल्स और टेक को एक ही टीम में रखिए। जो लोग रोज़ बात नहीं करते, वो यहाँ जुड़ते हैं।

सीनियरिटी मिलाइए — हर ग्रुप में एक सीनियर और कुछ जूनियर। पदानुक्रम थोड़ी देर के लिए हटता है।

ग्रुप छोटे रखिए — 6–8 लोग आदर्श हैं। बड़े ग्रुप में कुछ लोग पीछे छिप जाते हैं।

कैप्टन घुमाइए — हर एक्टिविटी में अलग व्यक्ति को लीड करने दीजिए।

आउटिंग का असर कैसे मापें

"टीम बॉन्डिंग" सुनने में अच्छा लगता है, पर HR को अक्सर असर दिखाना पड़ता है। कुछ आसान तरीक़े:

  • आउटिंग से पहले और एक महीने बाद छोटा सा सर्वे
  • क्रॉस-डिपार्टमेंट बातचीत बढ़ी या नहीं, इस पर मैनेजर से पूछिए
  • फ़ोटो और वीडियो को इंटरनल न्यूज़लेटर में इस्तेमाल कीजिए
  • नए जॉइन करने वालों से पूछिए कि घुलने-मिलने में मदद मिली या नहीं

लॉजिस्टिक्स की डिटेल कॉर्पोरेट आउटिंग रिसोर्स पेज पर है।

साल में कितनी बार और कब

ज़्यादातर कंपनियाँ साल में एक बार आउटिंग कराती हैं, अक्सर साल के आख़िर में। पर असर के हिसाब से देखा जाए तो साल में दो बार बेहतर काम करता है।

नए वित्त वर्ष की शुरुआत में — नए लक्ष्य तय होते हैं, टीमें बदलती हैं, नए लोग जुड़ते हैं। ऐसे में आउटिंग सबको एक पेज पर लाने में मदद करती है।

किसी बड़े प्रोजेक्ट के बाद — लंबी डेडलाइन के बाद टीम थकी होती है। उस वक़्त एक दिन बाहर निकलना असल में रिकवरी का काम करता है।

मौसम के हिसाब से अक्टूबर से मार्च सबसे अच्छा रहता है — बाहर की एक्टिविटीज़ में गर्मी परेशान नहीं करती। गर्मियों में करना ही हो तो सुबह का स्लॉट लीजिए।

तारीख़ तय करते वक़्त महीने के आख़िरी हफ़्ते से बचिए, क्योंकि तब क्लोज़िंग का दबाव रहता है और लोग मन से शामिल नहीं हो पाते।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कितनी बड़ी टीम आ सकती है?

छोटी टीम से लेकर बड़े ग्रुप तक — संख्या बताकर पहले से स्लॉट बुक करा लें।

क्या ATV और पैरामोटरिंग कॉर्पोरेट पैकेज में हैं?

नहीं, दोनों की टिकट अलग से लेनी होती है।

लंच की व्यवस्था है?

हाँ, अंदर ही कैफ़े है। बड़ी टीम के लिए पहले से बता देना बेहतर रहता है।

जो लोग फ़िज़िकल एक्टिविटी नहीं कर सकते, उनके लिए?

कैरम, चेस, डार्ट बोर्ड और शेडेड बैठने की जगह मौजूद है।

ऑफिस आउटिंग प्लान करें

टीम साइज़ और तारीख़ बताइए, हम पूरा शेड्यूल सजेस्ट कर देंगे।